Penile Injection क्या है? फायदे, उपयोग, जोखिम और डॉक्टर क्या कहते हैं
Written by Dr. Srishti Rastogi
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December 21, 2025
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संक्षेप
पेनाइल इंजेक्शन एक डॉक्टर-द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला सुरक्षित मेडिकल ट्रीटमेंट है, जो इरेक्टाइल डिसफंक्शन, Peyronie’s disease, शीघ्रपतन और कुछ मामलों में लिंग की मोटाई बढ़ाने में मदद कर सकता है। ये इंजेक्शन सीधे लिंग के erectile tissue में ब्लड फ्लो बढ़ाकर तेज़ और भरोसेमंद असर दिखाते हैं। सही ट्रेनिंग, सही डोज और डॉक्टर की निगरानी के साथ इसके साइड इफेक्ट्स का जोखिम कम रहता है। ED की गोलियाँ जहाँ काम नहीं करतीं, वहाँ पेनाइल इंजेक्शन एक प्रभावी विकल्प हो सकते हैं। सही इलाज का चुनाव हमेशा डॉक्टर की सलाह और आपकी मेडिकल स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए।
क्या आपने पहले कभी “पेनाइल इंजेक्शन” शब्द सुना है? ज़्यादातर लोगों के लिए यह एक नया और अनसुना इलाज होता है। क्योंकि इसके बारे में खुलकर बात नहीं की जाती, इसलिए इसे लेकर भ्रम होना आम बात है। लेकिन पेनाइल इंजेक्शन दरअसल डॉक्टरों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक सुरक्षित मेडिकल ट्रीटमेंट है, जो इरेक्शन से जुड़ी समस्या के अलावा कई दूसरी यौन स्थितियों जैसे लिंग के टेढ़ेपन, शीघ्रपतन, जाँच (diagnosis) और कुछ मामलों में यौन आत्मविश्वास से जुड़ी समस्याओं में भी मदद करता है।
पेनाइल इंजेक्शन क्या होते हैं?
पेनाइल इंजेक्शन ऐसे मेडिकल इंजेक्शन होते हैं जिन्हें डॉक्टर की सलाह और ट्रेनिंग के साथ सीधे लिंग के अंदर दिए जाते हैं। मेडिकल भाषा में इन्हें इंट्राकैवर्नोसाल इंजेक्शन कहा जाता है। ये इंजेक्शन लिंग के उस हिस्से में दिए जाते हैं जहाँ इरेक्शन के लिए ज़िम्मेदार टिशू (erectile tissue) होता है। इन इंजेक्शनों में दी जाने वाली दवाएँ लिंग की मांसपेशियों को रिलैक्स करती हैं और वहाँ ब्लड फ्लो बढ़ाने में मदद करती हैं। इसका असर आमतौर पर तेज़ होता है और कुछ ही मिनटों में दिखाई देने लगता है। क्योंकि दवा सीधे उसी जगह दी जाती है जहाँ असर चाहिए, इसलिए पूरे शरीर पर अनावश्यक साइड इफेक्ट्स का खतरा कम रहता है। सही मात्रा और सही तकनीक से दिए जाने पर पेनाइल इंजेक्शन को सुरक्षित और प्रभावी इलाज माना जाता है।
Allo asks
क्या आपने पहले कभी Penile Injection के बारे में सुना है?
किन-किन स्थितियों में पेनाइल इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है?
पेनाइल इंजेक्शन को अक्सर केवल इरेक्शन की समस्या से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन असल में इनका उपयोग इससे कहीं ज़्यादा होता है। डॉक्टर इन्हें इलाज के साथ-साथ जाँच और कुछ विशेष परिस्थितियों में तुरंत राहत देने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। आइए जानते हैं कि किन स्थितियों में पेनाइल इंजेक्शन मददगार साबित होते हैं।
1. इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) के इलाज में
पेनाइल इंजेक्शन का सबसे आम और जाना-पहचाना उपयोग इरेक्टाइल डिसफंक्शन के इलाज में होता है। यह समस्या तब होती है जब लिंग में पर्याप्त इरेक्शन नहीं आ पाता या इरेक्शन टिक नहीं पाता। यह कैसे काम करता है? पेनाइल इंजेक्शन में दी जाने वाली दवाइयाँ:
- लिंग की मांसपेशियों को रिलैक्स करती हैं
- ब्लड वेसल्स को फैलाती हैं
- लिंग में ब्लड फ्लो बढ़ाती हैं
इसका असर आमतौर पर 5 से 15 मिनट के अंदर दिखाई देने लगता है और इरेक्शन सेक्स के लिए पर्याप्त मज़बूत हो सकता है।[1]
आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाइयाँ
- Alprostadil (Caverject / Edex): अपेक्षाकृत कम रिस्क, कुछ लोगों को हल्का दर्द महसूस हो सकता है [2]
- Papaverine: ब्लड फ्लो बढ़ाने में मदद करती है
- Trimix: तीन दवाओं का कॉम्बिनेशन, सबसे ज़्यादा असरदार माना जाता है
- Bimix: दो दवाओं का कॉम्बिनेशन
यह थेरेपी उन पुरुषों के लिए ख़ास तौर पर फायदेमंद होती है जिन पर Viagra या Cialis जैसी ओरल दवाइयाँ असर नहीं करतीं।[3]
2. Peyronie’s Disease (लिंग का टेढ़ापन)
Peyronie’s disease में लिंग के अंदर सख़्त स्कार टिशू बन जाता है, जिससे:
- लिंग टेढ़ा हो सकता है
- इरेक्शन के समय दर्द हो सकता है
- यौन संबंध बनाना मुश्किल हो सकता है
इलाज कैसे किया जाता है?
- Collagenase Injection (CCH) का इस्तेमाल किया जाता है [4]
- यह इंजेक्शन स्कार टिशू को धीरे-धीरे तोड़ने में मदद करता है
इसके फायदे
- लिंग का टेढ़ापन लगभग 30–35% तक कम हो सकता है [5]
- दर्द और असहजता में भी सुधार देखा जाता है
3. Premature Ejaculation (शीघ्रपतन)
कुछ पुरुषों में स्खलन बहुत जल्दी हो जाता है, जिससे यौन संतुष्टि पर असर पड़ता है।
इसमें पेनाइल इंजेक्शन कैसे मदद करता है?
- Hyaluronic Acid Injection को लिंग के आगे वाले हिस्से (glans) में दिया जाता है
- यह ज़्यादा संवेदनशील नसों पर एक तरह की सुरक्षा परत बनाता है
नतीजा
- सेक्स का समय 4 से 8 गुना तक बढ़ सकता है [6]
- इसका असर कई मामलों में 1 साल या उससे ज़्यादा समय तक बना रह सकता है
4. लिंग की मोटाई बढ़ाने के लिए (Girth Enhancement)
कुछ पुरुष अपने लिंग की मोटाई को लेकर असंतुष्ट महसूस करते हैं और इसके लिए मेडिकल विकल्प तलाशते हैं।
यह कैसे किया जाता है?
- Hyaluronic Acid या Dermal Fillers को लिंग के शाफ्ट में इंजेक्ट किया जाता है
इसके संभावित फायदे
- लिंग की मोटाई में औसतन 1.5–2 सेमी तक की बढ़ोतरी [7]
- आत्मविश्वास और यौन संतुष्टि में सुधार
- बॉडी इमेज को लेकर बेहतर महसूस करना [8]
5. डायग्नोसिस (जाँच के लिए पेनाइल इंजेक्शन)
पेनाइल इंजेक्शन सिर्फ इलाज के लिए ही नहीं, बल्कि सही समस्या पहचानने के लिए भी इस्तेमाल होते हैं।
Intracavernous Injection Test: यह टेस्ट यह समझने में मदद करता है कि इरेक्शन की समस्या मानसिक कारणों से है या ब्लड फ्लो से जुड़ी है।
Penile Doppler Ultrasound: इंजेक्शन के साथ किया जाने वाला यह टेस्ट लिंग की नसों और ब्लड सर्कुलेशन की पूरी जानकारी देता है।
6. Priapism (बहुत देर तक इरेक्शन) का इलाज
अगर किसी कारण से इरेक्शन 4 घंटे से ज़्यादा बना रहे, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।
ऐसे मामलों में क्या किया जाता है?
- विशेष दवाओं का पेनाइल इंजेक्शन दिया जाता है [9]
- इससे इरेक्शन को सुरक्षित तरीके से खत्म किया जाता है
- समय पर इलाज न होने पर स्थायी नुकसान हो सकता है
पेनाइल इंजेक्शन कैसे दिए जाते हैं और किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है?
पेनाइल इंजेक्शन सुनने में भले ही डरावने लगें, लेकिन सही ट्रेनिंग और गाइडेंस के साथ इन्हें देना एक controlled और सुरक्षित प्रक्रिया होती है। डॉक्टर आमतौर पर मरीज को पूरा तरीका सिखाते हैं, ताकि इंजेक्शन सही जगह और सही मात्रा में दिया जा सके।
इंजेक्शन कैसे दिया जाता है?
- सबसे पहले डॉक्टर या हेल्थकेयर प्रोफेशनल द्वारा proper training दी जाती है
- इंजेक्शन के लिए बहुत पतली सुई (insulin needle जैसी) का इस्तेमाल होता है
- इंजेक्शन लिंग के साइड वाले हिस्से में दिया जाता है, न कि ऊपर या नीचे
- हर बार इंजेक्शन देने की जगह बदलना ज़रूरी होता है, ताकि टिशू को नुकसान न पहुँचे
ज़्यादातर लोग कुछ बार प्रैक्टिस के बाद इसे आसानी से और बिना घबराहट के कर पाते हैं।
पेनाइल इंजेक्शन के संभावित साइड इफेक्ट्स
हर मेडिकल ट्रीटमेंट की तरह, पेनाइल इंजेक्शन के भी कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। हालाँकि, सही डोज और सही तकनीक से दिए जाने पर ये आमतौर पर हल्के और अस्थायी होते हैं।
संभावित साइड इफेक्ट्स:
- इंजेक्शन की जगह पर हल्का दर्द या सूजन
- नीला निशान (bruising)
- बहुत देर तक बना रहने वाला इरेक्शन, जिसे Priapism कहा जाता है
- बार-बार गलत जगह इंजेक्शन देने से स्कार टिशू बनने का खतरा [10]
अच्छी बात यह है कि डॉक्टर की सलाह और सही डोज के साथ इन जोखिमों की संभावना बहुत कम हो जाती है।
अक्सर मरीज साइज को लेकर ज़्यादा चिंतित रहते हैं, जबकि असल में ज़्यादातर यौन समस्याएँ इरेक्शन की क्वालिटी और आत्मविश्वास से जुड़ी होती हैं। पेनाइल इंजेक्शन का उद्देश्य प्रदर्शन और फंक्शन सुधारना होता है, न कि अवास्तविक बदलाव देना।
पेनाइल इंजेक्शन लेते समय ज़रूरी सावधानियाँ
पेनाइल इंजेक्शन से बेहतर और सुरक्षित परिणाम पाने के लिए कुछ सावधानियों का पालन करना बेहद ज़रूरी है:
- डॉक्टर से पूरी ट्रेनिंग लिए बिना खुद से इंजेक्शन न लें
- एक हफ्ते में 2–3 बार से ज़्यादा इंजेक्शन न करें
- ED की दूसरी दवाओं (जैसे Viagra, Cialis) के साथ बिना डॉक्टर से पूछे इस्तेमाल न करें
- अगर इरेक्शन 4 घंटे से ज़्यादा बना रहे, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत अस्पताल जाएँ
इन सावधानियों का पालन करने से पेनाइल इंजेक्शन एक सुरक्षित, प्रभावी और भरोसेमंद इलाज साबित हो सकता है।
पेनाइल इंजेक्शन लेने के लिए कौन सुरक्षित नहीं है?
हालाँकि पेनाइल इंजेक्शन कई पुरुषों के लिए सुरक्षित और प्रभावी होते हैं, लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होते। कुछ स्थितियों में डॉक्टर इस इलाज से बचने या विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
पेनाइल इंजेक्शन इन लोगों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते:
- जिन्हें ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर (जैसे हीमोफीलिया) हो
- जो ब्लड थिनर दवाइयाँ (जैसे Warfarin) ले रहे हों
- जिनके लिंग में पहले से ज़्यादा स्कार टिशू या गंभीर Peyronie’s disease हो
- जिन्हें बार-बार Priapism का खतरा रहता हो
- जिनमें इंजेक्शन देने की जगह पर इंफेक्शन या त्वचा की समस्या हो
- जो डॉक्टर की ट्रेनिंग और फॉलो-अप के बिना खुद से इंजेक्शन लेना चाहते हों
इसके अलावा, अगर ED का कारण हार्मोनल असंतुलन, मानसिक तनाव या जीवनशैली से जुड़ा हो, तो पहले दूसरे इलाजों पर ध्यान देना ज़्यादा सही माना जाता है। यही वजह है कि पेनाइल इंजेक्शन शुरू करने से पहले पूरी मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर की सलाह बेहद ज़रूरी होती है।
पेनाइल इंजेक्शन या ED की गोलियाँ: कौन-सा विकल्प बेहतर है?
इलाज का विकल्प
फायदे
सीमाएँ
पेनाइल इंजेक्शन
• असर तेज़ और ज़्यादा भरोसेमंद • डायबिटीज़ या नसों से जुड़ी ED में ज़्यादा प्रभावी • पूरे शरीर पर साइड इफेक्ट्स कम • तब भी काम करते हैं जब गोलियाँ असर न करें
• शुरुआत में इंजेक्शन को लेकर झिझक • सही ट्रेनिंग और तकनीक ज़रूरी • हर बार spontaneous sex संभव नहीं
ED की गोलियाँ (Viagra / Cialis)
• इस्तेमाल में आसान • इंजेक्शन जैसा डर नहीं • हल्की या शुरुआती ED में प्रभावी
• हर व्यक्ति पर असर नहीं करतीं • सिरदर्द, फ्लशिंग, एसिडिटी जैसे साइड इफेक्ट्स • दिल की कुछ बीमारियों में सीमित उपयोग
अगर गोलियाँ असर कर रही हैं और साइड इफेक्ट नहीं हो रहे, तो वे अच्छा विकल्प हो सकती हैं। लेकिन जिन मामलों में गोलियाँ काम नहीं करतीं, वहाँ पेनाइल इंजेक्शन ज़्यादा प्रभावी साबित होते हैं। इसलिए सबसे सही फैसला वही है जो डॉक्टर की सलाह, आपकी मेडिकल स्थिति और आपकी सुविधा को ध्यान में रखकर लिया जाए।
निष्कर्ष
पेनाइल इंजेक्शन एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हैं जो इरेक्टाइल डिसफंक्शन, लिंग का टेढ़ापन, शीघ्रपतन और मोटाई बढ़ाने जैसी यौन समस्याओं में मदद कर सकते हैं। सही ट्रेनिंग, सावधानियाँ और डॉक्टर की निगरानी के साथ इसका उपयोग जीवन की गुणवत्ता और यौन आत्मविश्वास बढ़ाने में फायदेमंद साबित होता है। ED की गोलियाँ और पेनाइल इंजेक्शन दोनों ही विकल्प हैं, लेकिन सबसे अच्छा परिणाम वही देता है जो आपकी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार चुना गया हो।
डिस्क्लेमर
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या penile injections सच में काम करते हैं?
हाँ। डॉक्टर द्वारा दिए गए penile injections कई मामलों में इरेक्शन लाने और बनाए रखने में असरदार साबित होते हैं, खासकर तब जब Viagra या Cialis जैसी गोलियाँ काम न करें। सही दवा, सही डोज और सही तकनीक के साथ इनका असर भरोसेमंद माना जाता है।
क्या penile injections से लिंग का साइज बढ़ सकता है?
इरेक्शन के लिए दिए जाने वाले penile injections का मकसद साइज बढ़ाना नहीं होता। हालाँकि, कुछ विशेष injections जैसे dermal fillers या hyaluronic acid का इस्तेमाल लिंग की मोटाई (girth) बढ़ाने के लिए किया जा सकता है, वह भी डॉक्टर की सलाह से।
Penile injection क्या होता है?
Penile injection एक मेडिकल इंजेक्शन होता है जो सीधे लिंग के erectile tissue में दिया जाता है। इसका उद्देश्य लिंग की मांसपेशियों को रिलैक्स करना और ब्लड फ्लो बढ़ाना होता है, ताकि इरेक्शन आ सके या किसी खास यौन समस्या का इलाज किया जा सके।
Penile injections के long-term effects क्या होते हैं?
सही डोज और डॉक्टर की निगरानी में लंबे समय तक penile injections लेने पर ज़्यादातर लोगों में गंभीर long-term साइड इफेक्ट नहीं देखे जाते। लेकिन गलत तकनीक या ज़्यादा इस्तेमाल से scar tissue या priapism का खतरा हो सकता है।
क्या लिंग का साइज बढ़ाना संभव है?
प्राकृतिक तरीकों से लिंग का साइज स्थायी रूप से बढ़ना दुर्लभ है। कुछ मेडिकल विकल्प जैसे fillers, fat injection या traction devices मौजूद हैं, लेकिन ये केवल चुनिंदा मामलों में और डॉक्टर की सलाह से ही किए जाते हैं।
Sources
- 1.
Intracavernous injection therapy for male erectile dysfunction
- 2.
Efficacy and safety of intracavernosal alprostadil in men with erectile dysfunction. The Alprostadil Study Group
- 3.
Intracavernosal Injection for the Diagnosis, Evaluation, and Treatment of Erectile Dysfunction: A Review
- 4.
Collagenase Clostridium histolyticum for the Treatment of Peyronie's Disease: The Development of This Novel Pharmacologic Approach
- 5.
Clinical efficacy, safety and tolerability of collagenase clostridium histolyticum for the treatment of peyronie disease in 2 large double-blind, randomized, placebo controlled phase 3 studies
- 6.
Efficacy and Safety of Penile Girth Enhancement Using Hyaluronic Acid Filler and the Clinical Impact on Ejaculation: A Multi-Center, Patient/Evaluator-Blinded, Randomized Active-Controlled Trial
- 7.
Efficacy and complications of hyaluronic acid and polylactic acid for penile augmentation: a systematic review and meta-analysis
- 8.
Comparison of Clinical Outcomes between Hyaluronic and Polylactic Acid Filler Injections for Penile Augmentation in Men Reporting a Small Penis: A Multicenter, Patient-Blinded/Evaluator-Blinded, Non-Inferiority, Randomized Comparative Trial with 18 Mon...
- 9.
Management of priapism: an update for clinicians
- 10.
Complication Rates in Patients Using Intracavernosal Injection Therapy for Erectile Dysfunction With or Without Concurrent Anticoagulant Use—A Single-Center, Retrospective Pilot Study